ये दुनिया बड़ी ढकोसले वाली है ।कुछ समझाओ तो कहेगी "पहले खुद करो फिर बोलो",
और जब कर दिखा बोलोगे तो कहेगी
"तुम महान हो, सब तुम जैसे नहीं हो सकते"।
ऐसे समाज के लिए तो हिटलर चाहिए गाँधी नहीं ।
- प्रकाश 'पंकज'
पता नहीं अकस्मात् ये भावनाएँ क्यों झिंझोड़ जाती हैं । निमंत्रण बिना आती हैं और उद्वेलित कर चली जाती हैं ।
ये दुनिया बड़ी ढकोसले वाली है ।