कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
कविता लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 26 सितंबर 2010

वो राधा-किशन का प्रेम कहाँ? जगती जिसको दोहरा न सकी।

प्रेम गीत एक लिखने को
फिर कलम हमारी चल न सकी,
वो राधा-किशन का प्रेम कहाँ
जगती जिसको दोहरा न सकी? - प्रकाश 'पंकज'

रविवार, 8 अगस्त 2010

धारा का निर्देशक


धारा में बहने वाले न बनो !
जागृत हो या भ्रमित हो धारा,
धारा में बहते जाओगे ।


धारा को मोड़ने वाले बनो !
जागृत हो या भ्रमित हो धारा, 
सही दिशा ले जाओगे । 

-प्रकाश 'पंकज'