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मंगलवार, 5 अक्टूबर 2010

भरत-पुत्रों की चेतावनी

दुनिया वाले सुन लें ...
भरत-पुत्रों की सहनशीलता का तटबंध जब टूटता है,
वे भीम समान मानवता भूल रक्तपिपासु हो जाते है,
शत्रु-वक्ष की रुधिर-चासनी पी कर ही अघाते हैं ।
 ... कोशिश हो ऐसा रक्तिम इतिहास दोहराया न जाये ।   
– प्रकाश ‘पंकज’

रविवार, 6 दिसंबर 2009

मानवता अवसाद हो गयी स्वान-संस्कृति उभर रही,

मानवता अवसाद हो गयी स्वान-संस्कृति उभर रही,
पर इसमें भी सुन्दरतम विश्वास्पात्रता कहाँ  रही ?