सोमवार, 16 नवंबर 2009

अब रावण कहो या दुश्शासन, तरस रहे हम तरने को !

अब रावण कहो या दुश्शासन,  तरस रहे हम तरने को !

3 टिप्‍पणियां:

  1. गहरी बात ..... अब तो प्रतीक्षा है राम या कृष्ण की ..........

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  2. अब रावण कहो या दुशाशन, अब तरस रहे हम तरने को
    (अगली पंक्ति जोड़ने की अनुमति चाहता हूँ )
    जो कुछ था सब हर लिया, अब बचा नहीं कुछ करने को

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  3. धन्यबाद गोदियाल जी और दिगम्बर जी !

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