गुरुवार, 23 जून 2011

कभी न पूरी हो सकने वाली जिद्द

तारीखें याद नहीं रहती,
घड़ियों को देखना छोड़ दिया..
मैंने हर उसके लिए रुकना छोड़ना सोंचा था जो मेरे लिए न रुका ...
..
(कभी न पूरी हो सकने वाली जिद्द?)

- प्रकाश 'पंकज'

1 टिप्पणी:

  1. कैलेण्‍डर और घड़ी देखना छोड़ा अच्‍छी बात है पर अपन खुद अभी क्‍या हैं यह देखना बहुत ही जरूरी होता है... नहीं >?

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